मैं कावड़ लानी से।
म्हारे रामा कंवर रो घोड़लो,
घुमतो आवे।।
मात-पिता तेरे भूखे बैठे, मने जीमावन आया क्यों
सांवरा खड़ी रहूं के घर जाऊं रे,
कोई जाये जो वृन्दावन,
मेरा पैगाम ले जाना,
नाथ मै तो हार गई,
घोंट के भांग तुम्हारी,
चारो पल्ला सुआ मोर, बीच में कोयल करती शोर।
मेरे लिले वाला श्याम सब देवों में देव निराला।
तेरे वृन्दावन आकर सारी दुनिया भूल जाते है
करूं गौरी की पूजा मैं तन मन से, मेरी मांग सिंदूर से लाल रहे ।
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