तू झूम झूम झूम।तू झूम झूम झूम,
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तू झूम झूम झूम।तू झूम झूम झूम,
जब गिरते हुए मैने तेरा नाम लिया है
तो गिरने ना दिया तूने मुझे थाम लिया है ।
निर्गुण गालियां सांकरी म्हारी हेली
हमरो सिया दाई के ऊंची रे महलिया।
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
तुलसा जी मजा मे रीजो।
रंग तूने प्रेम का जो मुझपे चढ़ाया है।
मैं तो बगिया में बोय आई भांग की कली,
जटा सिर धारी संकरा हो, तेरे गले में नागों की माला की डम डम डमरू बजे।
फागुन के दिन चार होली खेल मना र
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