गढ गोकुल से गुजरी आई,की कानजी ने ट्लो दे गई रे।
सांवरा ओ राधा उभा बिलखे
अरे तू मन की मौज उड़ा दे भंवरा फिर नहीं आएगा।
झूला झूले रे सांवरियो,
आगी सावन की रमझोल
कान्हा तेरे चरणों में हम अपना घर बसाएंगे
मैं हूं पतंग मेरी डोर सांवरे।
मारा खाटू वाला श्याम, म्हारा खाटू वाला श्याम
लगी कलजुग री फटकार प्रेम में कांकरा पड़गया।
कान्हा कूद पढ्यो रे जमुना में,
बन ठन के रे ओ लिले चढ़ के,
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