सीया सुकुमारी मिथिला की दुलारी,
पांवा गढ़ सु उत्तरी कालका, संग भेरू ने लाइ हे
काम संवारो सबके श्री गणेश,
जीवन के सारे मिटा दो कलेश।
गजानंन बेगा आओ,
साथ रिद्धि सिद्धि ने ल्याओं,
मैं तो जपु सदा तेरा नाम सतगुरु दया करो
तेजाजी सररर सररर कोई चाले कालो नाग
रंगीला सखी बनडा ओ मुरली वाला।
मुख चंदा सा लट घूंगराली,
तुझ संग लगी है कैसी लगन। डमरू की धुन पर मैं नाचू मगन
क्या मांगू मैं भोले तुमसे
कैसे तेरा ध्यान धरूँ
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