म्हारो बाबा से नातो पुरानो ,इ दुनिया ने काई बेरो।
मेरा खाटू वाला श्याम मेरा रखवाला जी।
पिंजरो पटपट बोले रे ,थारा गोडा चट चट बोले रे।
कोई द्वारका जाओ तो महासू मिलता जाजो जी।
पांव में घुंघरू श्याम श्याम जपू हाथ में ले खड़ताल।
हे दशरथ नंदन राम बन्ना मिथिलापुर तुमको जाना है
छूट जाती है बाबुल की गलियां, दूर ले जाते हैं संजोग।
लगा लो जरा जयकारा, दीवाना श्याम जग सारा ।
दाने-दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम
तेरी पायल की मीठी आवाज बन्नी जरा धीरे चलो।
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