हरि भजवा रे काज बणायो ,
मोहन मंदिरियो।
पाया है अब पाया है म्हाने सद्गुरु भेद बताया है।
सतगुरु अविगत भेद बताया, तार न टूटे मेरी कबुहन छूटे,
गुरासा शरण आपरी आया .
म्हारे गुरुदेव घर आया रे ,भाग पुरबलो जागो,
मारे गरूदेव घर आया सा,
आणन्द हिया अपार ।।
म्हारी गोर तिसांई जी ,राज घटियांरो मुकुट करो।
म्हारा हरिया जंवारा ओ राज लंबा-तिखा सरस बदृया।
जब से धोखा देकर गयो, श्याम संग नहीं खेली होली।
दिल का क्या करूं यह तेरे बिना नहीं लगता नहीं लगता।
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