मालिक म्हारो सांवरियो,
बन गयो मैं तो चाकरियो,
लेते जाना रे हरि का नाम थोड़ा
बाहर खड़े भोलेनाथ मने सत्संग में जाना है।
नाव ले चल हमारी भी उस पार सांवरे।
जिसे श्याम तेरी चाहत होगी,फिर ना किसिकी चाहत होगी
जगजननी तुम ही मां भवानी हो तुम
भवन में मां है खड़ी। कर सोलह सिंगार भवन में मां है खड़ी।
जय जय भवानी, मनरमणी, माता पुरवासिनी चवंदा
हे नंद नंदन करते हैं वंदन दे दे थोड़ा प्यार, कन्हैया आया तेरे द्वार।
होरी खेले नंदलाल,
आज बरसाने में,
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