मैं तो गौरी रे गटक थे काळा जी , ओ नंद जी के लाला ।
ये भूखा खुद क्या खाएगा,
किसी को क्या खिलाएगा,
फागण आयो स रंगीलो, म्हाने श्याम बुलावे स,
जो हार के आया है वह जीत के जाएगा।
मां तेरे दरबार में हम आ गए,
मेरा तो ये खाटू वाला,
लगता रिश्तेदार,
इतनी ही कृपा मेरे बाबा केवल में तेरी चाहूं।
फागण आयो है रंगीलो,
रंग डारो श्याम जी,
हार के भी जो ना हारे,
जीतकर वो जायेगा,
भोले नाथ परणीजन आया,
देखो जान रो खटको,
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