प्रेम रंग से भरी ये ब्रज की होरी लागे,
मैं खाटू जाऊंगा,
फागण को आने दो,
थाम लो ना हाथ मेरा सांवरे,
हारकर दरबार तेरे आया हूँ,
अरे मैं कैसे दुध बिलोउ श्याम ने पकड लई बईयां।
डारो डारो री रंग बनवारी पै, डारो डारो री।
डारो डारो री रंग बनवारी पै, डारो डारो री।
विष पीने का शौक नहीं पीता संकट मिटाने को।
नाम लेगा जो बजरंगबली का,
कष्ट जीवन के सारे कटेंगे,
भटकते रहेंगे हम तो होके बावरे
तेरे बिन जाये कहां ओ सांवरे।
श्री श्याम कृपा रस का कतरा भी चुका पाऊ,
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