कलयुग में बाबा श्याम ने वो काम किया है ,
जो आया गिरते पड़ते उसे थाम लिया है ,
संवारे सेठ का प्यार पा कर मुझे,
न तमना रही अब किसी प्यार की,
छोड़ दे सारी चिंता मेरे श्याम पे ,
दिल से इक बार तू श्याम का नाम ले ,
बैठ सामने तेरे बाबा,
तुझको रोज़ मनाता हूँ,
शिंगार आज तेरा मन को बड़ा लुभाता ,
कन्हैया आछी बजाई रे तू तो बासुरी
रोती हुयी आँखों को
मेरे श्याम हंसाते हैं
रंग मैं होरी कैसे खेलूंगी जा सांवरिया के संग
सुख हो या दुःख प्यारे जब भी बुलाएगा
करले भरोसा बाबा दौड़ा दौड़ा आएगा
तुमसे मेरा ये जीवन तुमसे ही शान है ,
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