होरी खेल रहे नंदलाल,
वृंदावन कुंज गलिन में,
सजे हैं दूल्हे से बने हैं दूल्हे से ,
पगड़ी सजाये सर पे श्याम सजे हैं दूल्हे से ,
म्हाने संवारे को आयो है बुलावा,
के होली आई सा रा रा रा,
फागणियो आयो रे,
मंदिर में बड़ग्यो सांवरो,
कोई तीरथ मेरे मन को भाता नहीं,
खाटू वाले का जबसे ये दर मिल गया,
खाटू जाने को जब मेरा मन बावरा ललचाता ,
लौ तू लगा श्याम से,
मुश्किल हो चाहे,
कितनी बड़ी भी,
मेरे घर आज कीर्तन है मेरे श्री श्याम आ जाओ
किस्मत संवर गयी है,
तेरी शरण में आकर,
मेरे श्याम सलोने की दरबार की यही कहानी ,
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