बन्नो गठरी चलो वृंदावन चलिए,
रंग लेके खेलते गुलाल लेके खेलते, राधा संग होली नंदलाल खेलते,
रोज रोज का ओलमा क्यों ल्यावे रे म्हारा कानूडा।
ओ खाटू वाले श्याम का मैखाना खुल गया
जन्नत सी सजी नगरी चमक रहा दरबार,
धर्म कर्म में लगा जन्म क्यों भटके रेत में,
मोटी मोटी आंखें हैं घुंघराले बाल है।
मन में महादेव जी, ने दिल में पार्वता। बीच में शंकर रो चेलो, शंख बजावे।
अगड़बम अगड़बम बाजे डमरू। नाचे रे भोलोनाथ आगे हैं भेरू
चढ़ो चढ़ो साडू का कंवरा, चढ़ो चढ़ो साडू का वो लाला।
You must be logged in to post a comment.