फागुन की ग्यारस जब आ जाती है तो, साँवरे की याद सताती है।
मेरा संकट कटने वाला है, बजरंगबली की किरपा से।
हाथ जोड़ कर करूँ मैं विनती, सांवरिया सरकार।
श्याम का मेला, श्याम का मेला। हर साल फागुन में आता है श्याम का मेला।
खाटू की गलियों में मेरा डेरा बस जाए। जब जब पलकें खोलू तेरा चेहरा नजर आए।
अब किसी महफ़िल में जाने, की हमें फुर्सत नहीं,
बड़ा प्यारा लगे है दरबार बाला जी,
जब से देखा तुम्हे डमरू वाले दिल हमारा ठिकाने नहीं है।
बड़ा प्यारा लगे बजरंगबली, बड़ा सोना लगे बजरंगबली।
फागण रंगीला आया,खाटू चलो,
श्याम बाबा ने बुलाया,खाटू चलो।
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