अयोध्या नगरी, आज सोने री भई,
इक तेरा प्यार, सोणा यार मैनू मिल जावे, मैं दुनिया तो होर की लेना।।
पिहरियो सो खाटू धाम ने, छोड़ के घर जद जावा हाँ
मन भाये सखी री, सिया के सजना।।
काहे काया का करता गुमान रे, सुबह शाम जपो राम जपो राम।।
पूरा ध्यान लगा, गुरुवर दौड़े दौड़े आएंगे।
खाटू नगरी को हम, दुल्हन सा सजायेंगे
आयो फागणियो, आयो फागणियो सजी है, देखो सारी नगरी।
आरती बालकृष्ण की कीजे, अपनो जन्म सफल कर लीजे,
काहे रोए यहाँ तेरा कोई नहीं। किसको सुनाए यहाँ कोई नही
You must be logged in to post a comment.