लो आ गयो फागन मेलो,चाल्यो है श्याम को रेलों,
मेरे हाथों में पिचकारी ना कोई रंग की पुड़िया।
सावरिया नन्द किशोर हाँ किशोर,
मेरी साड़ी पे रंग दाल गायों,
बाबा श्याम मेरे काम आपने सवारे हैं।
आयो फागणियो मस्तानों, चालो खाटू जावा जी।
ओ बाबा बोल जा, ओ बाबा मान जा, मैं थारो लादू मुकुट,बाबा बोल जा
फागण की मस्ती में डुबकी लगाने देखो दीवाने आते हैं,
Uske bhakto ki gaddi Puri 150 pe chale,
हो मेलो फागण को, चालों खाटू धाम।
काले श्याम हमारे री बहना छलिया ने जुल्म गुजारे॥
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