कैसी तुम्हारी सवारी चूहा बड़े उत्पाती,
Author: Pushpanjali
दिल है बेकरार श्याम तेरे बिना,
मेरे जीवन की डोर गणेश तेरे हाथों में,
बाबा मेरे हार गया हूँ, अब आकर सम्भालो मुझे,
तुम्हारे ही सहारे है, सहारे मेरी नैया,
जब दिन गर्दिश के थे, ना कोई पूछने वाला था,
जिसकी किरपा से जीवन चले, करता है जो मेरे फैसले
आयो कहां से घनश्याम, रैना बिताई किस धाम,
कोई लाख करे कितना जतन रे, होनी सदा ही होवे,
खुश हो जाए तो सांवरा,
हर ठाट देता है,
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