सारा जीवन करू चाकरी
बोलुं जय जयकार।
Author: Pushpanjali
हर मंगलवार हमारे घर आया करो।
ऐसो दातार कठे देख्यो ना सुण्यो जी
वेद शास्त्र ढुंढ लिए एक ओम बराबर ना कोन्या
रे बाबा देना है तो दे , मने तू क्यू तरसावे स,
मेरे अंगना में बोल रहा कागा, शगुन बड़ा भारी है।
खाता खोल के देख सांवरा,
चाकर बहुत पुराणो हूँ,
आज दिन ऐसा आयो नाचे दुनिया सारी,
मोरवी का लाल पधारो सब जाएँ बलिहारी
ये ओ सिर पे पंख मोर
बोले तोतले से बोल,
मेरी खो गई राम माला बालाजी तेरे मंदिर में,
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