रास्ता रोके पाप लागे मेरे कान्हा से डरियो
Author: Pushpanjali
मारो मन वांदरों रे ओ तो घणी रे फदाको मारे
शरण श्याम की ले ले, तेरे मिट जाएं सारे झमेले,
तेरे चरण मेरे मथुरा काशी
बनवारी ब्रज के वासी
मैं ना था किसी काम का, बन ना सका मैं श्याम का,
नाड़ी हूँ ना जाणे वैद, मुरख अनाड़ी रे ।।
हेली म्हारी बाहर भटके काँहि ,
शान निराली बालाजी तेरी शान निराली।
जग में साँचा रे राम सजाई,
अरे हंसला रे, चुगले चुगले,
मोतीड़ा रो चून,
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