पत्थर की राधा प्यारी,
पत्थर के कृष्ण मुरारी,
Author: Pushpanjali
लै के खंडा हथ विच आउंदी,
एजी खेलते रहउं मेैं बालू रेत,मुदरिया मोरी कहां रे गिरी।
अंजनी का लाला रे भगतो का रखवाला रे,
ओ अज्ज रात शिवरात्रि दी आई भगतो,
हर ग्यारस पर मैं ही आऊँ ऐसा ना हो पाये
भजन बिना रे ना काया किस काम की
ओ नचनगे, तेरे भगत भोलेया,
दिन होवे जा रात,
भोला नाथ ने मनावा ने आया,
तेरा जब संकट कटूंगी मने पहले चाहिए भोग रे,
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