सतगुरु जी मैं, जाऊं चरणा बलिहारी, सायब म्हारा सतगुरु जी ।।
Author: Pushpanjali
मन से हंस बने मत कागा, संगत छोड़ दे खोटा की,
श्याम दर्शन, जरा दिखा जाओ, दिल की कुटिया, में मेरी आ जाओ ।
बनेंगे सारे बिगड़े काम, प्रभु श्री राम को पूजो,
आ गया फागण मेला अब तो शोर होना चाहिए।
शिवरात्रि का त्यौहार है शिव शंकर का वार है।
देवा देवा ओ महादेवा मेरा मन तेरा कैलाश रे
श्याम के रंग में रंगना है।
एक तू ही है मेरा बाकी सब है वहम
भोले कब से खड़े है दिल थाम के,
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