थारी नगरी में सांवरिया भक्ता फाग मचायो रे। थारी नगरी में।
Author: Pushpanjali
गणराज विनायक आओ,
गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंद
सुपनो आयो ढलती रात ने निंदडली खोगी
इस सांवरिया के प्यार में कहीं पागल ना हो जाऊं
तू लंका का राजा से मैं रामदूत मतवाला सू
तेरे नाम की ओढ़ चुनरिया,
मैं तो नाचू बीच बाजार में,
ब्रज में बरसाना गांव, राधे मोहे प्यारी लागे।
अजब है तेरी माया,
ओम् का सिमरन किया करो,प्रभु के सहारे जिया करो।
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