अमवा की डाली लाई बगिया से तोड़के,
Author: Pushpanjali
बड़ी दूर से चलकर आया हूं, मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए
लांगुर ले चल बाजार गोलगप्पे खाऊंगी।
कब होगी मुझसे मां रूबरू,
साडे 9 बच्चों का बाप खिलौना मांगे लंगुरिया।
तेरी जोत जगदी तेरा भोग लगदा,
हम प्रेम दीवानी है, वो प्रेम दीवाना है,
मन तेरा मंदिर आँखे दिया बाती,
बिजल कड़के पगा में घुंघर घमके
आज तो मंदिर में बाज रही ढोलक
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