गोविंद तुम्हारे चरणों मे एक प्रेम पुजारी आया है ।गोविंद तुम्हारे चरणों मे एक दास भिखारी आया है ।
Author: Pushpanjali
ऐसी क्या ले लई मोल, हो मोल, जाऊँगी भोले पीहर को,
मुनि साँच बतादे,जीव कहां से आया
थे म्हारे घर आओ नंदलाला माखन मिश्री खाबा ने।
घर-घर में राधेश्याम, हो श्याम ,रहे झूल हिंडोले सावन के।
मैंने लगन लगाई श्रीराम की
मन में ज्योति जगाई हनुमान की,
लगाया हनुमत ने दरबार ,हो रही राम की जय जय कार
कुंवा रे तेरो ठंडो पानी, ठंडो पानी।
आज लूट रहया हीरा मोती रतन। नाच ले बाबा का कीर्तन।
कहते हैं दुनिया वाले तुम हो हारे के सहारे
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