कलयुग पल पल बढ़ता जाए रे विष्णु लो कल्कि अवतार
Author: Pushpanjali
चम चम चमके मुखड़ा इनका देखो मूषक पर है विराजे।
शिव गौरा के लाड़ले गणेश जी,
आओ अंगना पधारो श्री गणेश जी,
मेरा बिगड़ा मुकद्दर संभल जाए।श्याम मेरा अगर मुझको मिल जाए
आओं मेरी गलियन, गलियन में घनश्याम,
मुझे मिल गया नंद का लाल रसिया होलीन में।
कैसे कह दूँ,
दुआ बेअसर हो गई,
मैया री मैया शारदे तोहे,
लाल रंग की चुनरिया सोहे।।
थारे भरोसे बैठ्यो मैया,
कोई ना म्हारो है,
जिस ओर नजर फेरूं दादी,
चहुँ ओर नजारा तेरा है,
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