हरिदास रटो हरिदास रटो मन मूरख मेरे अंधा।
Author: Pushpanjali
श्याम के दर पे नाचांगे चौधरी इब के फागण में।
चंद्रशेखराए नमः गंगाधराए नमः
भोले शिव शंकर तो कण कण में समाए हैं।
घोटा घोटा मेरे शिवा ने लाया घोटा
ब्रज में हरि होरी मचाई।
भोला कहन लगा भोली ते ठीक नहीं तेरी ज़िद रानी
आई रे आई रे होली आई रे आई रे होली आई रे भक्तों की टोली
बाजे बरसाने में नगाड़ा, के होली आई आ रा रा रा।
अरी पकडौ री ब्रजनार, कन्हैया होरी खेलन आयो है,
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