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राम भजन लिरिक्स

Janak nagariya bhayile shor he suhawan Lage,जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे,ram bhajan

जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।

अवध नगरिया से चलली बरतिया हे सुहावन लागे। जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।



सब देवतन मिलि चलले बरतिया,
हे सुहावन लागे। बजवा बजेला घनघोर हे, सुहावन लागे।सब देवतन मिलि चलले बरतिया,
हे सुहावन लागे। बजवा बजेला घनघोर हे, सुहावन लागे।जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।

बजवा के शब्द हुलसे मोरी छतिया हे सुहावन लागे। चहु दिस भइल बा अजोर हे सुहावन लागे।बजवा के शब्द हुलसे मोरी छतिया हे सुहावन लागे। चहु दिस भइल बा अजोर हे सुहावन लागे।जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।



कहत र रसिक जन, दूल्हा के सुरतिया हे सुहावन लागे। सुफल मनोरथ भइले मोर हे सुहावन लागे।जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।



अवध नगरिया से चलली बरतिया हे सुहावन लागे। जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।जनक नगरीया भइले शोर हे सुहावन लागे।

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