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Holi geet

Umraw tharo pichrang pecho bhije mhara Raj,उमराव थारो पिचरंग पेचों भीजे म्हारा राज,

उमराव थारो पिचरंग पेचों भीजे म्हारा राज

तर्ज, उमराव थारी बोली

उमराव थारो पिचरंग पेचों भीजे म्हारा राज। उमराव जी ओ म्हारा राज।उमराव जी ओ म्हारा राज।

आभा चमके बिजली सिर पर बरसे मेघ।छांटा लागया प्रेम का भीजे सारी देह।उमराव थारो पिचरंग पेचों भीजे म्हारा राज। उमराव जी ओ म्हारा राज।उमराव जी ओ म्हारा राज।

साजन चालया चाकरी घर राखी बंदूक।के तो साग ले चलो के करद्यो दो टूक।उमराव म्हाने साग लेकर चलो म्हारा राज।उमराव जी ओ म्हारा राज।उमराव जी ओ म्हारा राज।

फूल गुलाबी पोमचो जामे पिचरंगो मोर। महे म्हारी मां की लाडली कद मुकलाओ होय। उमराव थे तो लेवन बेगा आओ म्हारा राज।उमराव जी ओ म्हारा राज।उमराव जी ओ म्हारा राज।

उमराव थारो पिचरंग पेचों भीजे म्हारा राज। उमराव जी ओ म्हारा राज।उमराव जी ओ म्हारा राज।

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