गुरु पैंया लागू , नाम लिखाय दीजो रे ।
जन्म-जन्म को सोयो म्हारो मनवो ,शब्दन मार जगाय दीजो रे ,
गुरु पैंया लागू , नाम लिखाय दीजो रे ।
घट अंधियारो नैन नहि सूझें, ज्ञान को दीपक जलाय दीजो रे।
गुरु पैंया लागू , नाम लिखाय दीजो रे ।
विष की लहर, उठत घट माही, अमृत बूँद चुआय दीजो रे ,
गुरु पैंया लागू , नाम लिखाय दीजो रे ।
गहरी नँदिया, अगम नहि धरना, खैई के पर, लगाय दीजो रे।
गुरु पैंया लागू , नाम लिखाय दीजो रे ।
धर्मदास ” की अरज गुसाईं, अबकी खेप, निभाय दीजो रे।गुरु पैंया लागू , नाम लिखाय दीजो रे ।