तर्ज – नी मैं यार मनाना नी
नी मैं श्याम मनाना नी, चाहे लोग बोलिया बोले, चाहे लोग बोलिया बोले, चाहे लोग बोलिया बोले, नी मैं बाज ना आना नी, चाहे लोग बोलिया बोले ।।
सारे मैनू रोगण कहंदे, रोग ना मेनू कोई, जददा वेखा श्याम सलोना, मैं तो रोगण होई, ये तो रोग पुराना नी, चाहे लोग बोलिया बोले, नी मैं बाज ना आना नी, चाहे लोग बोलिया बोले ।।
लख रोकण दी कोशिश करले, ये मेरे घर वाले, प्रीता कैद न होयियाँ, चाहे लख लगालो ताले, ताले तोड़ के आना नी, चाहे लोग बोलिया बोले, नी मैं बाज ना आना नी, चाहे लोग बोलिया बोले ।।
जद दा वेखा श्याम प्यारा, मैं मस्तानी होई, ओह दे रंग विच रंग के मेनू, लोड किसे दी ना होई, मैं ता शगन मनाना नी, चाहे लोग बोलिया बोले, नी मैं बाज ना आना नी, चाहे लोग बोलिया बोले
छड सारे मैं रिश्ते श्यामा, आई तैनू मनावण, टब्बर सारा छड आई, श्यामा तैनू रंग लगावण, तेरे रंग रंग जाना जी, चाहे लोग बोलिया बोले, नी मैं बाज ना आना नी, चाहे लोग बोलिया बोले ।।
नी मैं श्याम मनाना नी, चाहे लोग बोलिया बोले, चाहे लोग बोलिया बोले, चाहे लोग बोलिया बोले, नी मैं बाज ना आना नी, चाहे लोग बोलिया बोले ।।