तर्ज,काली तेरी चोटी है
बड़े ही प्यारे, लगते हैं खाटूश्याम जी,
इसी लिए करते हैं, तुझे प्रणाम जी,
मन की, मुरादें पा के, जाएंगे,
ओ बाबा श्याम, तेरे झंडे लहराएँगे।
शरण में आ के, दुःखियारे तर जाते हैं,
हारे के सहारे, सारे दुःख हर जाते हैं,
श्याम, तेरी महिमा, गाएँगे,
ओ बाबा श्याम, तेरे झंडे लहराएँगे।
बड़े ही प्यारे, लगते हैं खाटूश्याम जी,
इसी लिए करते हैं, तुझे प्रणाम जी,
मन की, मुरादें पा के, जाएंगे,
ओ बाबा श्याम, तेरे झंडे लहराएँगे।
तेरी दरबार में, सवाली बन आते हैं,
कर के दीदार तेरा, झोली भर जाते हैं,
वारी वारी, खाटू तेरे, जाएंगे,ओ बाबा श्याम, तेरे झंडे लहराएँगे।
बड़े ही प्यारे, लगते हैं खाटूश्याम जी,
इसी लिए करते हैं, तुझे प्रणाम जी,
मन की, मुरादें पा के, जाएंगे,
ओ बाबा श्याम, तेरे झंडे लहराएँगे।
राज तेरी महिमा का, दीवाना ऐसा हो गया,
रिया की दुआ का, प्रणाम ऐसा हो गया,
श्याम तेरे, गुणगान, गाएँगे,
ओ बाबा श्याम, तेरे झंडे लहराएँगे।
बड़े ही प्यारे, लगते हैं खाटूश्याम जी,
इसी लिए करते हैं, तुझे प्रणाम जी,
मन की, मुरादें पा के, जाएंगे,
ओ बाबा श्याम, तेरे झंडे लहराएँगे।
बड़े ही प्यारे, लगते हैं खाटूश्याम जी,
इसी लिए करते हैं, तुझे प्रणाम जी,
मन की, मुरादें पा के, जाएंगे,
ओ बाबा श्याम, तेरे झंडे लहराएँगे।