पर लग गए आज राधे के पांव में, उड़ती चली देखो संग संग हवाओं में। यह बात खुशबू से फैली सब दिशाओं में। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺एक दिल धड़कता है दो आत्माओं में। बाकी सारी बातों से मुख आज मोड़ के। राधा चली नंद गांव बरसाना छोड़ के।
कृष्णा कृष्णा राधे कृष्णा कृष्णा, कृष्णा कृष्णा राधे कृष्णा कृष्णा,
पहनी पायलिया बिंदिया सजा ली, सर पर माखन की मटकी उठा ली।🌺🌺🌺🌺🌺🌺 आंखों में उसको भरने चली है, रातों की जिसने निंदिया चुरा ली। तार मन के हृदय से नटवर के जोड़ के।राधा चली नंद गांव बरसाना छोड़ के।राधा चली नंद गांव बरसाना छोड़ के।
कृष्णा कृष्णा राधे कृष्णा कृष्णा,कृष्णा कृष्णा राधे कृष्णा कृष्णा,
राधा कहीं-कहीं श्याम लिखा है, और ना कोई नाम लिखा है। सृष्टि जिसे कहते हैं वहां बस, श्री वृंदावन धाम लिखा है। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺ज्ञानियों ने वेद जब भी देखन छोड़ के।राधा चली नंद गांव बरसाना छोड़ के।राधा चली नंद गांव बरसाना छोड़ के।
कृष्णा कृष्णा राधे कृष्णा कृष्णा,कृष्णा कृष्णा राधे कृष्णा कृष्णा,