तर्ज,एक परदेशी मेरा दिल ले गया
काया रूपी चुंदड़ी के रंग चढ़ग्यो,खाटू वालो श्याम म्हारे मन बसग्यो।
श्याम रंग चुनरी,खाटू में रंगाई है,आयो रंग चोखो म्हारे,मनडे,ने भाई है।दूजो रंग ओढूं नाही,मन नटग्यो। खाटू वालो….
सत्संग को गोटो लाग्यो,भक्ति रूपी जाल है।श्याम नाम तारा मोती,खूब लाग्यो माल है। ओढ्या फिरूं सगले मेरो,के घटग्यो। खाटू वालो…
ओढ़ के या चुनरी में,श्याम ने दिखाऊंगी। मीठी मीठी बाता करके,श्याम ने रिझाऊंगी।दर्शन देने खातिर बाबो,लीले चढ़ग्यो।खाटू वालो…
श्याम आयो पावनियो यो,मन हरसायो है।बाजरे की रोटी साग, फलियां को बनायो है। फोगलिया को रायतो यो, चट करग्यो ।खाटू वालो….
माया ममता त्रिष्णा सखी,चार देखन आईजी ।हो गयो मन ज्ञान प्रीत,श्याम में लगाई जी ।सीताराम मीत मेरो, सोदो पटग्यो ।खाटू वालो..