मनमोहना मधुसूदना, श्री बांके बिहारी लला,
लाल लाल लहंगे में गोटा चमके।आओ प्यारे भक्तों दर्शन करने।
माँ की हर बात निराली है,
सज के संवर के लीले पे चढ़ के
खाटू का राजा आ गया,
हरी हर एक है दोनों
न ये कम है न वो कम है।
तुमको जो देखे, वो तेरे ही हो जाते है,
ऐसी लागी रे लगन, भटके रे वन वन बृजबाला,
खाटू की नगरी फागुन का मेला,हो रही रेलमपेल,भगत सब झूम रहे
म्हारा पियर में साहिबा, बोई गणगौर।
मैं गोकुल जाऊं री मेरा रोवे री कन्हैया,
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