आ जाओ मेरी मां प्यारी, आस लगी तेरे दर्शन की।
चलो बुलावा आ गया है,
पवन के झोंके से,
किसने रचाई मेहंदी हाथों में
तेरा किसने किया सिंगार दरबार प्यारा लागे रे।
रेल रेल चली रे भाई रेल चली
छुक छुक करती रेल चली
तू ओढले ने जोगन माँ नखराली ये, घूँघट में दिखे नथ बाली।
तेरी मोरछड़ी से सांवरे,
दुःख दूर हो गए,
मेरे मन में बस गई रे,
मैया जी तेरी सुरतिया,
मेरे दिल को छू गई है मुस्कान तेरी प्यारी।
म्हारी हालो ये रेल भवानी सतगुरु जी के चला देश,म्हारी हालो ये…..
उड़ जा काला कागला साँवरियो आवे रे,
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