आज मैया का कीर्तन हमारे अंगना।
तेरा द्वारा मां तेरा द्वारा, तीनों लोकों में बड़ा प्यारा जयकारा मां का।
बैठी हो माँ सामने,
कर सोलह श्रृंगार,
तू करुणा की है मूर्ति,
और ममता का भण्डार,
मैयाजी तेरा सजा हुआ दरबार
भगत जयकारे बोल रहे।
तुम अपने रंग में रंग लो हे माँ दुर्गे हे माँ दुर्गे,
चुन चुन के फूल ले आई बगिया से तोड़ के,
मैं माला इनकी बनाऊँ फूलों को जोड़ के…..
जय माता दी, जय माता दी, बोल रहे हैं सारे,
मईया के दर पे भक्त है आये,
करते है माँ का गुणगान,
मैया शेर पर चढ़कर आजा, तेरे भगत खड़े हैं गली गली।
दरवाजे पे झांकू कभी छत से देखूं, चारो ओर निहारूं मै आज रे मेरा आता होगा भातैया।
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