लहराये देखो कैसे लाखों निशान हैं
मन रोये मेरा जब भी तब ओ मेरे सांवरे,
धन-धन अवध की नगरिया,
सखी री जहां जन्मे श्री भगवान
माँ मेरा मन करता है…
एक बार दर पे बुला ले मेरा मन करता है
मैया तेरे मंदिरों का मैंने गुण गाया है,
रघुकुल गौरव जय श्री राम,
निस दिन निस पल तुम्हें प्रणाम,
मेरे घर के आगे माँ तेरा एक मंदिर बन जाये,
माँ कौशल्या तुझको पुकारे
चले आओ अब राम हमारे
तुम्हारा था तुम्हारा हूँ,
तुम्हारा ही रहूँगा मैं,
तुम्ही मेरी नइया,
किनारा तुम्ही हो,
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