श्री राम दीवाना जा रहा था हवा के झोके से,
हरि से कुन्तीं नें दुख मांगा
सांवरिया चैन चुराए गेयो रे
श्याम मेरो सपने में आये गयो रे।
बड़ा लगदा है दुनिया च डर शंभुआ,
बैसाखी का दिन अज्ज आया,
संगता ने प्रभु दर्शन पाया,
फुल बरसांदी आवां दातिये,
रंग बरसांदी आवां दातिये,
नाम लेते ही बन जाते हैं मेरे बिगड़े काम
भेदी भेद ना खुलने पाए,
चाहे धरती गगन टकराये,
तुम तो बोले करो तपस्या लेते नहीं खबरिया रे
बाबा अब तो बुला लो ना द्वार।
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