ओ खाटू वाले जब से शरण तेरी आई,
हारे के साथी तूने लाज बचाई…..
मोह माया का छोड़ के चक्कर भक्ति में रम जाऊं रे,
भोले तुम पर्वत हम नीचे खड़े,
हरिद्वार में मिलेंगे दोनों जने
ओ बाबा तुमसे नहीं है कोई शिकवा गिला,
हे रघुनंद दशरथ नंदन गाऊँ भजन तेरा करके मैं वंदन,
हम दीवाने, महादेव के, हम दीवाने
सांवरे रखले मुझे सांवरे,
मेरे हालात पे तेरी खामोशियाँ साँवरे,
अब सही हमसे जाती नही,
भेरुजी प्रकटिया प्रगटिया, नदी गोमती माय,
Ye baba to mera rakhwala hai
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