रूठी मेरी माँ मैं कैसे मनावाँ,
तीनों लोकों में है सबसे निराला,
वो कान्हा मेरे मन बसता,
कहाँ से आया कहाँ जाओगे
खबर करो अपने तन की
मारा भेरू खजुरिया वाला वो, थाने जातरी बुलावे।
माई मैं तो देख्या दो वनवासी, देख्या देख्या दो संन्यासी,
दरबार सजा तेरा न्यारा,
निरखत निरखत मैं हारा,
काले काले ओ कमली वाले तेरे नखरे हजार है।तेरी मुरली पे नाचे ग्वाल बाल है।
कभी तो पधारो श्याम अंगना हमारे।
शुकर तेरा माँ शुकर तेरा,
सीता कितनी सुंदर नार रामायण में सुन आई,
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