दर्शन पाना है आज दाता जी दरबार तेरे,
तुलसा घूम रही ब्रज धाम जाने कहां लेगी विश्राम,
दिया जले अमावस रात कालका जन्म लियो,
दूर खड़े क्या देख रहे हो,
साँवलीए सरकार,
शेरावाली मां हमारे घर तुम आईयो,
दो नैनों की ज्योति,
मन में श्रद्धा और विश्वास लिए,
भोले गिरिजा पति हूँ तुम्हारी शरण,
माता अनुसूया के द्वार भिक्षा मांगे राजकुमार,
चाहे जितना ले ले कान्हा काहे को तरसता है,
शेरावाली माँ
लाटावाली माँ
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