पंचवटी के बीच सिया रावण ने चुराई रे…..
थोड़ी कृपा करदे सांवरे हम गुण गायेंगे तेरे,
जीवन व्यर्थ गवायो, ना मुख से राम नाम गायो
ज्योत जगाएंगे निशान उठाऐगे
आये नहीं घनश्याम हो साडी सर से सरकी,
मैया समझाए रही पार्वती तू रोएगी पछताएगी
होली खेलन आजा रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी,
मनवा सतगुरु सेवा कीजे, लीजे भली बुरी पहचान,
मेरे राम के चरण को मन में बसा लो भैया,
जबसे हुई है तेरी मेहरबानी,
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