दुनिया में सबसे सच्चा यही इश्क रे
कालो भाटो कूबड़ो ए, ईसरदास को धन उजलो ए
थारा घोड़लिया सिणगारो ओ ब्रह्मादासजी रा ईसरदासं।आज म्हारो गोरबिन्दोरो नीसर्यो
म्हारा माथ न मैमद ल्यावो,म्हारा हंजा मारू यहीं रहो जी
हर्या ए झूवारा, गींवला सा प्यारा, तो सिर स ऊँचा होरया जी
मां तेरा सच्चा द्वारा, लगे भक्तों को पर प्यारा।
कन्या रूप स्वरूप है मेरा कंजक रूप में आती हूं,
म्हारा हर्या ए झुंवारा ए,गिहूँला सिरस बध्या
ओडो कोडो बीरा आंवलारे, राई चरण को राख
मैया बैठी है भवन में ओढ़े चुनरी।
You must be logged in to post a comment.