वो चुलकाना नगरी पावन और बड़ी महान,
घर श्याम दी गली दे विच पा लिया,
श्यामा वे बंसी वालिया मैं तेरे बिन ना रैहन्दी,
इक बारी वृन्दावन जाना पै गया,
मैं तां मुड़ आई दिल उत्थे रह गया….
भजले श्याम फिर ये जनम दोबारा मिले ना मिले,
भक्तो में एक भक्त मेरे
हनुमान बड़े हैं प्यारे
कहाँ से आया कहाँ जाओगे
खबर करो अपने तन की
शहर मेरा झूम रहा शिव तेरे नाम से
एक कंधे पर लखन विराजे दूजे पर रघुवीर,
मेरा देव तू मेरा महादेव भी तू
मेरे काल का महाकाल तू
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