हरि सुमिरन करो सुबह शाम हरि जी बेड़ा पार करें
आनंदपुर में जो सज कर बैठे हम उस के दीवाने है…..
नंदलाला काल है तू और कामरिया तेरी काली,
राम सिया राम सिया राम सिया राम,
सब से पेहले तूने मेरा दिल किया चोरी
एक तुम्हीं आधार सद्गुरु एक तुम्हीं आधार…
मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश
श्री राम लक्ष्मण दोनों किस हाल में होंगे,
आया सुदामा तेरे द्वार श्याम नेक आ जाईयो,
मैं तो लायी चुनरिया लाल,
माता तेरे दरबार पे,
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