मेरे आंगनिये पधारो, मेरे श्याम धणी सरकार, मेरे आंगनिये,
मेरी बरसाने कुटिया बना दे, तू रीझ मेरी राधे,
मेहंदीपुर का ये बजरंग बाला बड़ा, इसके दर से ना कोई भी खाली गया,
मुझको ना कोई चिंता, नहीं कोई डर,
श्याम की मुरली का है, स्वीट तराना,
वृन्दावन के बांके बिहारी, हम दर तेरे आये है,
जहाँ जिनकी जटाओं में गंगा की, बहती अविरल धारा,
सतगुरु शरण में, सभी फल मिलेंगे,
भूल गया मानव मर्यादा, जब कलयुग की हवा चली,
तुझे देख के दिल भरता ही नहीं, अब जाऊं कहाँ मैं सांवरिया,
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