बोली बोली रे कोयलिया हर हर महादेव,
तेरे सोहणे सोहणे दर्शन पावा,
वृन्दावन रेहन वालया,
कोई देवता नही है भोलेनाथ की तरह,
की कहने की कहने मेरे हारा वाले दे की कहने
सोते-सोते सोने सा जीवन व्यर्थ गुजारा है,
विश्वास तू कर मुझपे तुझे जीत दिलाऊंगा,
अरे मन पापी मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो…..
ओ बाईसा अब तो हमको बाबोसा के दर्श करा दो ना,
रंगी गई मै रंगी गई, श्याम दे रंग विच रंगी गई
नाम जपले हरि दा प्यारे, जग मेला चार दीन दा,
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