मन पवन री घोड़ी,
घोड़ी रे, पाँच बछेरा,
सीता आगे धरे ना पांव मुड़ कर देख रही पीछे को
भगतो पे जब जब विपदा आई,
कौन बना रखवाला मेरा डमरू वाला,
रघुवर ने उठाकर धनुष को दिया तोड़,
बजरंगी लाये खबरिया राम आये नगरिया,
नेकी के कर्म किए जा रे दुनिया से जाने वाले,
शिव की गौरा चली पनिया लेकर गगरी,
सीता के राम रखवाले थे,
जब हरण हुआ तब कोई नहीं,
गौरी मैया के कारे नंदलाल कन्हैया मोसे मत बोले,
मस्त अघोरी मस्त मस्त,
दम अघोरी मस्त मस्त मलंग,
You must be logged in to post a comment.