आज के दिवस की मैं जाऊं बलिहारा, मेरे घर आया राजा राम जी का प्यारा,
कावड़िया ले चल गंग की धार, जहाँ बिराजे भोले दानी, करके अनोखा श्रृंगार,
भोले बाबा से कह रही पार्वती तुम सुनियो जी कैलाशपति,
झूला झुलत बिहारी वृंदावन में, कैसी छाई हरियाली इन कुंजन में
ऐ मेरे श्याम इनायत कर दे, अपनी करुणा से, मुझ गरीब की झोली भर दे,
थारी जोत जगे घर घर में, सुबह शाम बालाजी,
ओ बाबोसा महर करो, मेरे सिर पर हाथ धरो,
जग में मिठो बोल भाईडा, सबसे मिठो बोल रे, धरती पर थोङो, जीवनो पंछिङा रे।
जय जय जय शम्भू,
चलो चले भोले की नगरीया,
भोले भाले डमरू वाले, नंदी के असवार, शरण तेरी आ गया,
You must be logged in to post a comment.