दर पे खड़ी हूँ पतंग बन के,
आओ भोले बाबा तुम डोर बन कर।
आजा बाबा आजा अब तो
और न तू तरसा, निकले आँख से आंसू जैसे, सावन है बरसा
प्रीतम मत परदेस सिधारो, रुत सावन की सांवरिया रे,
महाकाल बाबा उज्जैन वाले, जीवन मेरा तेरे हवाले,
तू सुमिरन कर राधे राधे, तेरे कष्ट सभी मिट जाएंगे,
आजा बाबा आजा अब तो और न तू तरसा,
ओ सांवरे नैया लगा दे मेरी पार,
छोड़ दे ओ भोले बाबा छोड़ दे,
इस भांग नशे ने छोड़ दे।
पहली क्यु परणया भोला, म्हारो क्यु पकडयो छो हाथ,
सारी दुनिया का काम यो बनावे, दोनों हाथां से यो भर भर लुटावे,
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