छोटा सा कन्हैया देखो, पलने में झूले रे,
माखन मटकी, छीके पे लटकी, करके ना जोरा जोर, काले ने झटकी,
फागण का नज़ारा है ,
आयी है खाटु से चिट्ठियाँ,
श्याम बाबा ने पुकारा है ।
फागुन की रुत ऐसी आई है, खाटू में मस्ती छाई है,
फागण की रुत आई, फागण की रुत आई। मस्त चले पुरवाई फागण की रुत आई।
जल जल कलेजे में छाले पड़े,
ऐसे भोले बाबा से पानी पडे।
ऐसा मारे सांवरिया रो प्यार, ओ बाबा जी,
नगर-नगर, डगर-डगर, बम-बम भोला,
नाच रहे जमके देखो नंदी-भोला।
,जन्मे ब्रिज में नंदलाला सब बधाई गाओ रे,
छीन लिया मेरे दिल का चैन करार तू ओ कान्हा,
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